Monday, 1 February 2016

FOR CLASS 6 TH " पाठ 16 - वन के मार्ग में हिंदी "

प्रश्न अभ्यास
कविता से
1. प्रथम सवैया में कवि ने राम-सीता के किस प्रसंग का वर्णन किया है?
उत्तर
प्रथम सवैया में कवि ने राम-सीता के वन-गमन प्रसंग का वर्णन किया है।
2. वन के मार्ग में सीता को होने वाली कठिनाइयों के बारे में लिखो।
उत्तर
वन के मार्ग में जाते हुए सीता थक गईं। उनके माथे से पसीना बहने लगा और होंठ सूख गए। वन के मार्ग में चलते-चलते उनके पैरों में काँटें चुभने लगे।

3. सीता की आतुरता देखकर राम की क्या प्रतिक्रिया होती है?
उत्तर
सीता की आतुरता को देखकर श्रीराम व्याकुल हो उठते हैं। सीता को थका और प्यासा देख उनकी आँखों से आँसू बहने लगते हैं। वह इस बात से परेशान हो उठते हैं कि सीता को इतना कष्ट उनके वजह से झेलना पड़ रहा है।
4. राम बैठकर देर तक काँटे क्यों निकालते रहे?
उत्तर
राम से सीता की व्याकुलता देखी नहीं जा रही थी। लक्ष्मण पानी की तलाश में गए हुए थे इसलिए जब तक लक्ष्मण लौट कर आते हैं तब तक वे सीता की व्याकुलता और कष्ट को कम करना चाहते थे इसलिए राम बैठकर देर तक काँटे निकालते रहे क्योंकि अभी उन्हें और चलना था।
5. सवैया के आधार पर बताओ कि दो कदम चलने के बाद सीता का ऐसा हाल क्यों हुआ?
उत्तर
 सीता राजा जनक की पुत्री थीं। उनका जीवन राजमहलों में बिता था। इस पकार की कठिनाइयों को उन्होंने ने कही नहीं देखा था। इसलिए अभ्यस्त न होने के कारण उनका ऐसा हाल हुआ।
6. 'धरि धीर दए' का आशय क्या है?
उत्तर
इस पंक्ति का आशय है धैर्य धारण करना। सीता वन मार्ग पर चलते हुए, राम का साथ देते हुए, तकलीफों को सहते हुए मन-ही-मन स्वयं को धीरज बँधा रहीं थीं।
अनुमान और कल्पना
• अपनी कल्पना से वन के मार्ग का वर्णन करो।
उत्तर
वन का मार्ग कठिनाइयों से भरा होता है। रास्ते में चारों तरफ लम्बे-लम्बे वृक्ष खड़े होते हैं और बीचों-बीच कँटीली झाड़ियाँ होती हैं। रास्ता उबड़-खाबड़, पत्थरीला और दलदली भी होता है। पेड़ों से घिरे होने के कारण सूरज की रोशनी भी काम पहुँचती है जिससे अँधेरा भी होता है साथ ही रास्ता जंगली जानवरों से भरा होता है।
भाषा की बात
• लखि - देखकर धरि - रखकर
पोछि - पोंछकर जानि - जानकर
ऊपर लिखे शब्दों और उनके अर्थ को ध्यान से देखो। हिंदी में जिस उद्देश्य के लिए हम क्रिया में 'कर' जोड़ते हैं, उसी के लिए अवधी में क्रिया में ि (इ) को जोड़ा जाता है, जैसे अवधी में बैठ + ि = बैठि और हिंदी में बैठ + कर = बैठकर। तुम्हारी भाषा या बोली में क्या होता है? अपनी भाषा के ऐसे छह शब्द लिखो। उन्हें ध्यान से देखो और कक्षा में बताओ।

उत्तर
मेरी मातृ भाषा पंजाबी में उपर्युक्त उद्देश्य के लिए क्रिया के साथ 'के ' का प्रयोग करते हैं | जैसे - 
i) लिख के    ii) पढ़ के     iii) सो के     iv) खोल के     v) चल के |

FOR CLASS 6 TH " पाठ - 15 नौकर हिंदी "

प्रश्न अभ्यास
निबंध से
1. आश्रम में कॉलेज के छात्रों से गाँधी जी ने कौन-सा काम करवाया और क्यों?
उत्तर
आश्रम में कॉलेज के छात्रों से गाँधी जी ने गेंहूँ बीनने का काम करवाया। उन्हें अपने अंग्रेजी ज्ञान पर बड़ा गर्व था। बातचीत के अंत में उन्होंने गांधीजी से कोई कार्य माँगा चूँकि उन्हें लगा की वे उन्हें पढ़ने-लिखने सम्बंधित कार्य देंगे परन्तु गाँधी ने उनकी मंशा को भांपते हुए उन्हें गेहूँ बीनने का कार्य सौंप दिया।
2. 'आश्रम में गाँधी कई ऐसे काम भी करते थे, जिन्हें आमतौर पर नौकर-चाकर करते हैं'। पाठ से तीन ऐसे प्रसंगों को अपने अपने शब्दों में लिखो जो इस बात का प्रमाण हों।
उत्तर
• जब वे बैरिस्टरी से हज़ारो रुपये कमाते थे उस समय भी वे प्रतिदिन सुबह खुद चक्की पर आटा पीसा करते थे।
• आश्रम में वे सब्जियाँ छिलने का काम करते थे।
• आश्रम के नियमानुसार सभी लोगों को मिल-बांटकर बर्तन साफ़ करना पड़ता था। एक बार उन्होंने बर्तनों की सफाई खुद किया।
3. लंदन में भोज पर बुलाए जाने पर गाँधी जी ने क्या किया?
उत्तर
लंदन में भोज पर बुलाए जाने पर गाँधी जी ने वहाँ तश्तरियाँ धोने, सब्जियाँ साफ़ करने और अन्य छूट-पुट काम करने में छात्रों की मदद करने लगे।

4. गाँधी जी ने श्रीमती पोलक के बच्चे का दूध कैसे छुड़वाया?
उत्तर
गाँधी जी ने श्रीमती पोलक के बच्चे का दूध छुड़वाने के लिए वे बच्चे को माँ से दूर अपने बिस्तर पर सुलाते थे। वह चारपाई के पास एक बरतन में पानी भरकर रख लेते बच्चे को प्यास लगे तो उसे पिला दें। एक पखवाड़े तक माँ से अलग सुलाने के बाद बच्चे ने माँ का दूध छोड़ दिया।
5. आश्रम में काम करने या करवाने का कौन-सा तरीका गाँधी जी अपनाते थे? इसे पाठ पढ़कर लिखो।
उत्तर
गाँधीजी अपना काम स्वयं करते थे और दूसरों से काम करवाने में सख्ती भी बरतते थे। गाँधी जी को काम करता देख उनके अनुयायी भी उनका अनुकरण कर कार्य करने लगते थे। इस प्रकार गाँधी जी स्वयं के उदाहरण द्वारा लोगों को काम करने की प्रेरणा देते थे।

निबंध से आगे
6. गाँधी जी इतना पैदल क्यों चलते थे? पैदल चलने के क्या लाभ हैं? लिखो।
उत्तर
पैदल चलने से शरीर स्वस्थ रहता है। रोज पैदल चलने से शारीरिक फुर्ती बनी रहती है, शरीर में कमजोरी महसूस नहीं होती। व्यक्ति तरोताजा महसूस करता है।

पृष्ठ संख्या: 113

भाषा की बात

1. (क) 'पिसाई' संज्ञा है। पिसना शब्द से 'ना' निकाल देने पर 'पीस' धातु रह जाती है। पीस धातु में 'आई' प्रत्यय जोड़ने पर 'पिसाई' शब्द बनता है। किसी-किसी क्रिया में प्रत्यय जोड़कर उसे संज्ञा बनाने के बाद उसके रूप में बदलाव आ जाता है, जैसे ढोना से ढुलाई, बोना से बुलाई।
मूल शब्द के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाने वाले शब्दांश को प्रत्यय कहते हैं।
नीचे कुछ संज्ञाएँ दी गई हैं। बताओ ये किन क्रियाओं से बनी हैं -
बुआई........................... कटाई...........................
सिंचाई........................... रोपाई...........................
कताई........................... रंगाई...........................


उत्तर

संज्ञा - क्रिया
बुआई - बोना
कटाई - काटना
सिंचाई - सींचना
रोपाई - रोपना
कताई - कातना
रंगाई - रंगना

पृष्ठ संख्या: 114

(ख) हर काम-धंधे के क्षेत्र की अपनी कुछ अलग भाषा और शब्द-भंडार होते हैं। ऊपर लिखे शब्दों का संबंध दो अलग-अलग कामों से है। पहचानो कि दिए गए शब्दों के संबंध किन-किन कामों से हैं।

उत्तर

दिए गए शब्द कृषि तथा कपड़े से संबंधित है।
2. (क) तुमने कपड़ो को सिलते हुए देखा होगा। नीचे इस काम से जुड़े कुछ शब्द दिए गए हैं। आस-पास के बड़ों से या दरजी से इन शब्दों के बारे में पूछो और इन शब्दों को कुछ वाक्यों में समझाओ।
तुरपाई बखिया कच्ची सिलाई चोर सिलाई
उत्तर
तुरपाई - कपडे में तुरपाई कर दो। 
बखिया - रुमाल में बखिया लगा दो। 
कच्ची सिलाई - पहले कपडे में कच्ची सिलाई कर दो। 
चोर सिलाई - इस पैंट में चोर सिलाई करना।
3. नीचे लिखे गए शब्द पाठ से लिए गए हैं। इन्हें पाठ में खोजकर बताओ कि ये स्त्रीलिंग हैं या पुल्लिंग -
कालिख, भराई, चक्की, रोशनी, जेल, सेवा, पतीला
उत्तर
पुल्लिंग - पतीला
स्त्रीलिंग - कालिख, भराई, चक्की, रोशनी, जेल, सेवा

FOR CLASS 8 TH " पाठ 16 - पानी की कहानी हिंदी "

प्रश्न अभ्यास

पाठ से

1. लेखक को ओस की बूँद कहाँ मिली ?

उत्तर

लेखक को बेर की झाड़ी पर ओस की बूँद मिली। जब लेखक झाड़ी के नीचे से गुजर रहा था तो ओस की बूँद उसके कलाई पर गिरी और सरककर हथेली पर आ गई।

2. ओस की बूँद क्रोध और घृणा से क्यों काँप उठी?

उत्तर

पेड़ों द्वारा जल की बूँदों को बलपूर्वक धरती के भूगर्भ से खींच लाना व उनको खा जाना, अर्थात् पौधें ज़मीन से जल प्राप्त कर स्वंय के लिए पानी का प्रबंध करते हैं व कुछ को पृथ्वी के भूगर्भ से बाहर निकाल कर पृथ्वी पर ओस के रूप में ले आते हैं। जिसे याद करते ही बूँद क्रोध व घृणा से काँपने उठी।
3. हाईड्रोजन और ऑक्सीजन को पानी ने अपना पूर्वज/पुरखा क्यों कहा?

उत्तर

जब ब्रह्मांड में पृथ्वी व उसके साथी ग्रहों का उद्भव भी नहीं हुआ था तब ब्रह्मांड में हाईड्रोजन व ऑक्सीजन दो गैसें सूर्यमंडल में लपटों के रूप में विद्यमान थीं। किसी उल्कापिंड के सूर्य से टकराने से सूर्य के टूकड़े हो गए उन्हीं टूकड़ों में से एक टुकड़ा पृथ्वी रूप में उत्पन्न हुआ और इसी ग्रह में ऑक्सीजन व हाइड्रोजन के बीच रासायनिक क्रिया हुई। इन्होंने आपस में मिलकर अपना प्रत्यक्ष अस्तित्व गँवा कर पानी को जन्म दिया। इसिलए बूँद ने इन दोनों को अपना पूर्वज कहा है।

4. "पानी की कहानी" के आधार पर पानी के जन्म और जीवन-यात्रा का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

उत्तर

पानी का जन्म हाइड्रोजन व ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रक्रिया द्वारा होता है। ये दोनों आपस में मिलकर अपना आस्तित्व समाप्त कर जल के रूप में विद्यमान हो जाते हैं। सर्वप्रथम बूंद भाप के रूप में पृथ्वी के वातावरण में ईद-गिर्द घूमती रहती है, तद् पश्चात् ठोस बर्फ के रूप में विद्यमान हो जाती है। समुद्र से होती हुई वह गर्म-धारा से मिलकर ठोस रूप को त्यागकर जल का रूप धारण कर लेती है।

5. कहानी के अंत और आरंभ के हिस्से को स्वंय पढ़कर देखिए और बताइए कि ओस की बूँद लेखक को आपबीती सुनाते हुए किसकी प्रतीक्षा कर रही थी?

उत्तर

ओस की बूँद सूर्य उदय की प्रतीक्षा कर रही थी।

पृष्ठ संख्या: 104

भाषा की बात

1. किसी भी क्रिया को संपन्न अथवा पूरा करने में जो भी संज्ञा आदि शब्द संलग्न होते हैं, वे अपनी अलग-अलग भूमिकाओं के अनुसार अलग-अलग कारकों में वाक्य में दिखाई पड़ते हैं; जैसे-“ वह हाथों से शिकार को जकड़ लेती थी।” जकड़ना क्रिया तभी संपन्न हो पाएगी जब कोई व्यक्ति (वह) जकड़नेवाला हो, कोई वस्तु (शिकार) हो जिसे जकड़ा जाए। इन भूमिकाओं की प्रकृति अलग-अलग है। व्याकरण में ये भूमिकाएँ कारकों के अलग-अलग भेदों;
जैसे- कर्ता, कर्म, करण आदि से स्पष्ट होती हैं।
अपनी पाठ्यपुस्तक से इस प्रकार के पाँच और उदाहरण खोजकर लिखिए और उन्हें भलीभाँति परिभाषित कीजिए।

उत्तर

(1) मैं प्रति क्षण उसमें से निकल भागने की चेष्टा में लगी रहती थी।
(2) आगे एक और बूँद मेरा हाथ पकड़कर ऊपर खींच रही थी।
(3) हम बड़ी तेजी से बाहर फेंक दिए गए।
(4) वह चाकू से फल काटकर खाता है।
(5) बदलू लाख से चूड़ियाँ बनाता है।
(1)मैं - कर्त्ता
(2) पकड़कर - सबंध कारक
(3) तेज़ी से - अपादान कारक
(4) चाकू से - करण कारक
(5) लाख से - करण कारक

Saturday, 30 January 2016

FOR CLASS 7TH "पाठ - 19 आश्रम का अनुमानित व्यय (लेखा-जोखा) हिंदी "

प्रश्न अभ्यास

लेखा जोखा

1. हमारे यहाँ बहुत से काम लोग खुद नहीं करके किसी पेशेवर कारीगर से करवाते हैं। लेकिन गाँधी जी पेशेवर कारीगरों के उपयोग में आनेवाले औज़ार-छेनी, हथौड़े, बसूले इत्यादि क्यों खरीदना चाहते होंगें?

उत्तर

गाँधी जी आश्रम में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाना चाहते होंगें इसलिए वह पेशेवर कारीगरों के उपयोग में आनेवाले औज़ार-छेनी, हथौड़े, बसूले इत्यादि खरीदना चाहते होंगें।

2. गाँधी जी ने अखिल भारतीय कांग्रेस सहित कई संस्थाओं व आंदोलनों का नेतृत्व किया। उनकी जीवनी या उनपर लिखी गई किताबों से उन अंशों को चुनिए जिनसे हिसाब-किताब के प्रति गाँधी जी की चुस्ती का पता चलता है?

उत्तर
गांधीजी बचपन में स्कूल हमेशा समय पर जाते और छुट्टी होते ही घर वापस चले आते। वे समय के पाबंद इंसान थे। वे कभी भी फिजूलखर्ची नहीं करते थे यहाँ तक कि पैसा बचाने के लिए वे कई बार कई किलोमीटर पैदल यात्रा करते थे क्योंकि उनका मानना था कि धन को जरुरी कामों में ही खर्च करना चाहिए। कुछ किताबों के इन अंशों से हिसाब-किताब के प्रति गाँधी जी की चुस्ती पता चलता का है।

(छात्र स्वयं भी गांधीजी की जीवनी पर आधारित किताबें पढ़कर जवाब दे सकते हैं।)

4. आपको कई बार लगता होगा कि आप कई छोटे-मोटे काम (जैसे - घर की पुताई, दूध दुहना, खाट बुनना) करना चाहें तो कर सकते हैं। ऐसे कामों की सूची बनाइए, जिन्हें आप चाहकर भी नहीं सीख पाते। इसके क्या कारण रहे होंगे? उन कामों की सूची भी बनाइए, जिन्हें आप सीखकर ही छोड़ेंगे।

उत्तर

कपड़े सिलना - यह काम मुझे बहुत पेचीदा लगता है इसलिए मैं इसे नही कर पाता।
पेड़-पौधे लगाना - चूँकि मुझे पौधों के बारे में ज्यादा जानकारी नही है इसलिए मुझे यह नही आता।
पेड़-पौधे लगाना, कार चलाना, कम्प्यूटर चलाना आदि काम मैं सीखकर ही छोड़ूंगा।

(छात्रों को अपने विचारों के अनुसार उत्तर दे सकते हैं।)

5. इस अनुमानित बजट को गहराई से पढ़ने के बाद आश्रम के उद्देश्यों और कार्यप्रणाली के बारे में क्या-क्या अनुमान लगाए जा सकते हैं?

उत्तर

आश्रम में स्वयं काम करने को ज्यादा महत्व दिया जाता था क्योंकि गांधीजी ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।गांधीजी लोगों को आजीविका प्रदान कर, लघु उद्योग को बढ़ावा देकर, श्रम को बढ़ावा देकर उन्हें स्वावलंबी बनाना चाहते हैं।

भाषा की बात

1. अनुमानित शब्द अनुमान में इत प्रत्यय जोड़कर बना है। इत प्रत्यय जोड़ने पर अनुमान का न नित में परिवर्तित हो जाता है। नीचे-इत प्रत्यय वाले कुछ और शब्द लिखे हैं। उनमें मूल शब्द पहचानिए और देखिए कि क्या परिवर्तन हो रहा है -
प्रमाणित, व्यथित, द्रवित, मुखरित, झंकृत, शिक्षित, मोहित, चर्चित।

उत्तर

प्रमाणित - प्रमाण + इत
व्यथित - व्यथा + इत
द्रवित - द्रव + इत
मुखरित - मुखर + इत
झंकृत - झंकार + इत
शिक्षित - शिक्षा + इत
मोहित - मोह + इत
चर्चित - चर्चा + इत

इत प्रत्यय की भाँति इक प्रत्यय से भी शब्द बनते हैं और शब्द के पहले अक्षर में भी परिवर्तन हो जाता है, जैसे - सप्ताह + इक = साप्ताहिक।
नीचे इक प्रत्यय से बनाए गए शब्द दिए गए हैं। इनमें मूल शब्द पहचानिए और देखिए क्या परिवर्तन हो रहा है-
मौखिक, संवैधानिक, प्राथमिक, नैतिक, पौराणिक, दैनिक।

उत्तर

मौखिक - मुख + इक
संवैधानिक - संविधान + इक
प्राथमिक - प्रथम + इक
नैतिक - नीति + इक
पौराणिक - पुराण + इक
दैनिक - दिन + इक



2. बैलगाड़ी और घोड़ागाड़ी शब्द दो शब्दों को जोड़ने से बने हैं। इसमें दूसरा शब्द प्रधान है, यानी शब्द का प्रमुख अर्थ दूसरे शब्द पर टिका है। ऐसे सामासिक शब्दों को तत्पुरुष समास कहते हैं। ऐसे छः शब्द और सोचकर लिखिए और समझिए कि उनमें दूसरा शब्द प्रमुख क्यों है?

उत्तर

धनहीन - धन से हीन
रेलभाड़ा - रेल के लिए भाड़ा
रसोईघर - रसोई के लिए घर
आकाशवाणी - आकाश से वाणी
देशनिकाला - देश से निकाला हुआ
पापमुक्त - पाप से मुक्त

FOR CLASS 7 " संघर्ष के कारण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया: धनराज (साक्षात्कार) हिंदी "

पाठ - 18 संघर्ष के कारण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया: धनराज (साक्षात्कार) हिंदी 

प्रश्न अभ्यास
1. साक्षात्कार पढ़कर आपके मन में धनराज पिल्लै की कैसी छवि उभरती है वर्णन कीजिए।

उत्तर

साक्षात्कार के अनुसार धनराज पिल्लै खुले दिल के, सीधे-सरल और भावुक व्यक्ति हैं। वे बड़े ही कठिन आर्थिक संघर्षों से गुजरे जिससे वह अपने आप-को असुरक्षित समझने लगे थे। उन्हें गुस्सा बहुत अधिक आता है परन्तु वह अपने घर-परिवार की बहुत इज्जत करते हैं। उन्हें अपनी प्रसिद्धि पर जरा भी अभिमान नहीं है। लोगों को लगता है कि उनके स्वभाव में तुनक-मिजाजी आ गई परन्तु आज भी वे सरल व्यक्ति हीं हैं।

2. धनराज पिल्लै ने ज़मीन से उठकर आसमान का सितारा बनने तक की यात्रा तय की है। लगभग सौ शब्दों में इस सफ़र का वर्णन कीजिए।

उत्तर

धनराज पिल्लै की ज़मीन से उठकर आसमान का सितारा बनने तक की यात्रा बहुत ही संघर्षपूर्ण है। उनका एक बहुत गरीब परिवार में जन्म हुआ। इनसे बड़े दो भाई हॉकी खेलते थे जिसे देख इन्हें भी खेलने का शौक हुआ परन्तु स्टिक खरीदने के पैसे नही थे। ये अपने साथियों से स्टिक उधार मांग कर खेलते थे। इन्हें अपनी पहली हॉकी स्टिक तब मिली जब इनके बड़े भाई का चयन भारतीय कैंप के लिए हुआ। तब इनके बड़े भाई ने अपनी पुरानी स्टिक इन्हे दे दी। मात्र 16 की उम्र में इन्होनें जूनियर राष्ट्रीय हॉकी सन् 1985 में मणिपुर में खेली। 1986  इन्हें सीनियर टीम में डाल दिया गया। 1989 में ऑलविन एशिया कैंप में चुने जाने के बाद ये सफलता के सीढियाँ लगातार चढ़ते रहे। 1999 में महराष्ट्र सरकार ने इन्हें पवई में एक फ्लैट दिया और 2000 में इन्होनें अपनी फोर्ड आइकॉन खरीदी।

3. 'मेरी माँ ने मुझे अपनी प्रसिद्धि को विनम्रता से सँभालने की सीख दी है' -
धनराज पिल्लै की इस बात का क्या अर्थ है?

उत्तर

धनराज पिल्लै की इस बात का अर्थ है कि कई लोग प्रसिद्ध होने के बाद घमंडी हो जाते हैं परन्तु उनकी माँ द्वारा दिए संस्कारों के कारण आज वह प्रसिद्धि प्राप्त करने के बाद भी विन्रम स्वभाव के हैं। इंसान चाहे जितना ऊँचा उठ जाएँ परन्तु उसमें घमंड की भावना नहीं होनी चाहिए।

साक्षात्कार से आगे

1. ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है। क्यों? पता लगाइए।

उत्तर

ध्यानचंद हॉकी के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी थे। उनके स्टिक से बॉल सटती तो गोल होकर ही वापस आती। वह हॉकी को एक करिश्माई अंदाज़ में खेलते। वह तीन बार ओलम्पिक के स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे हैं। इसलिए ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है।

पृष्ठ संख्या: 134

2.किन विशेषताओं के कारण हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल माना जाता है?

उत्तर

सन् 1928 से लेकर 1956 तक भारत ने हर ओलम्पिक में हॉकी में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस खेल ने गुलाम भारत को विश्व में एक पहचान दिलाई इसलिए हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल माना जाता है।

अनुमान और कल्पना

1. 'यह कोई जरुरी नहीं कि शोहरत पैसा भी साथ लेकर आए' - क्या आप धनराज पिल्लै की इस बात से सहमत हैं? अपने अनुभव और बड़ों की बातचीत के आधार पर लिखिए।
उत्तर
हम धनराज पिल्लै की इस बात से सहमत हैं क्योंकि हमारे समाज में बहुत से संगीतकार, कलाकार, साहित्यकार, रंगकर्मियों, खिलाड़ी आदि हैं जिन्हें शोहरत तो मिली परन्तु उनके काम का उचित मेहनताना नहीं मिला। पैसा और शोहरत दोनों अलग चीज़ें हैं। पैसा तो गलत कामों से भी कमाया जा सकता है परन्तु शोहरत केवल अपने काम के प्रति प्यार से प्राप्त होता है।

भाषा की बात

1. नीचे कुछ शब्द लिखे हैं जिनमें अलग-अलग प्रत्ययों के कारण बारीक अंतर है। इस अंतर को समझाने के लिए इन शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए -
1. प्रेरणा, प्रेरक, प्रेरित
2. संभव, संभावित, संभवत:
3. उत्साह, उत्साहित, उत्साहवर्धक

उत्तर

1. प्रेरणा - महात्मा गांधी के आदर्शों से हम सबको प्रेरणा लेनी चाहिए।
प्रेरक - महापुरुषों की कथाएँ प्रेरक होती हैं।
प्रेरित - बहादुरी की कहानियाँ मुझे बहादुर बनने के लिए प्रेरित करती हैं।

2. संभव - यह काम मेरे लिए संभव है।
संभावित - परीक्षा की अभी संभावित तिथि ही जारी हुई है।
संभवत: - संभवत: आज बारिश होगी।

3. उत्साह - आज का दिन उत्साह भरा रहा।
उत्साहित - आज छात्र बड़े उत्साहित हैं।
उत्साहवर्धक - यह किताब छात्रों कर लिए उत्साहवर्धक है।

2. तुनुकमिज़ाज शब्द तुनुक और मिज़ाज दो शब्दों के मिलने से बना है। क्षणिक, तनिक और तुनुक एक ही शब्द के भिन्न रूप हैं। इस प्रकार का रूपांतर दूसरे शब्दों में भी होता है, जैसे - बादल, बादर, बदरा, बदरिया; मयूर, मयूरा, मोर; दर्पण, दर्पन, दरपन। शब्दकोश की सहायता लेकर एक ही शब्द के दो या दो से अधिक रूपों को खोजिए। कम-से-कम चार शब्द और उनके अन्य रूप लिखिए।

उत्तर

वर्षा - बारिश, बरखा, बरसात
चन्द्रमा - चंदा, चाँद, चन्द्र
नया - नया, नवीन, नूतन
पैर - पग, पद, पाँव
3. हर खेल के अपने नियम, खेलने के तौर-तरीके और अपनी शब्दावली होती है। जिस खेल में आपकी रुचि हो उससे संबंधित कुछ शब्दों को लिखिए,
जैसे - फुटबॉल के खेल से संबंधित शब्द हैं - गोल, बैकिंग, पासिंग, बूट इत्यादि।
उत्तर

क्रिकेट - गेंद, बल्ला, विकेट, रन, पिच, आदि।

Sunday, 17 January 2016

FOR CLASS 8 TH STD सूरदास के पद Q & A

सूरदास के पद 
प्रश्न अभ्यास

पदों से

1. बालक श्रीकृष्ण किस लोभ के कारण दूध पीने के लिए तैयार हुए?

उत्तर

बालक श्रीकृष्ण अपनी चोटी बलराम जी की चोटी की तरह मोटी और बड़ी करना चाहते थे इस लोभ के कारण वे दूध पीने के लिए तैयार हुए चूँकि उनकी माता यशोदा बताया की दूध पीने से उनकी चोटी बलराम भैया की तरह हो जाएगी।

2. श्रीकृष्ण अपनी चोटी के विषय में क्या-क्या सोच रहे थे?

उत्तर
श्रीकृष्ण बलराम भैया की तरह लम्बी, मोटी चोटी चाहते हैं। उनके अनुसार नहाते वक्त जैसे बलराम भैया की चोटी नागिन जैसी लहराती है वह भी उसी प्रकार की चोटी चाहते हैं और इसी विषय में सोचा करते हैं।

3. दूध की तुलना में श्रीकृष्ण कौन-से खाद्य पदार्थ को अधिक पसंद करते हैं?

उत्तर

दूध की तुलना में श्रीकृष्ण को माखन-रोटी अधिक प्रिय है।

4. 'तैं ही पूत अनोखौ जायौ'- पंक्तियों में ग्वालन के मन के कौन-से भाव मुखरित हो रहे हैं?

उत्तर

यहाँ पर ग्वालन के हृदय में यशोदा के लिए ईर्ष्या की भावना व क्रोध के भाव मुखरित हो रहे हैं। जहाँ वे एक तरफ कृष्ण का यशोदा पुत्र होने की वजह से ईर्ष्या से ग्रसित हैं वहीं दूसरी और उसके द्वारा चोरी व सारा माखन खाने से क्रोधित हैं। इसलिए वह यशोदा माता को उलाहना दे रही हैं।

5. मक्खन चुराते और खाते समय श्रीकृष्ण थोड़ा-सा मक्खन बिखरा क्यों देते हैं?

उत्तर

श्रीकृष्ण माखन चुराते समय आधा माखन खुद खाते हैं व आधा अपने सखाओं को खिलाते हैं। जिसके कारण माखन जगह-जगह ज़मीन पर गिर जाता है।

6. दोनों पदों में से आपको कौन-सा पद अधिक अच्छा लगा और क्यों?

उत्तर

दोनों पदों में प्रथम पद सबसे अच्छा लगता है। क्योंकि यहाँ श्रीकृष्ण अपने बालपन के कारण माता से अनुनय-विनय करते हैं कि तुम्हारे कहने पर मैंने दूध पिया पर फिर भी मेरी चोटी नहीं बढ़ रही। उनकी माता से उनकी नाराज़गी व्यक्त करना, दूध न पीने का हट करना, बलराम भैया की तरह चोटी पाने का हट करना हृदय को बड़ा ही आनन्द देता है। ये पद श्रीकृष्ण की बाल-लीला के कारण मनोहारी जान पड़ता है जिसे सूरदास जी ने बड़े ही उत्तम ढ़ंग से प्रस्तुत किया है।

भाषा की बात

1. श्रीकृष्ण गोपियों का माखन चुरा-चुराकर खाते थे इसलिए उन्हें माखन चुरानेवाला भी कहा गया है। इसके लिए एक शब्द दीजिए।

उत्तर

माखनचोर

2.  श्रीकृष्ण के लिए पाँच पर्यायवाची शब्द लिखिए।

उत्तर

गोविन्द, रणछोड़, वासुदेव, मुरलीधर, नन्दलाल।

पृष्ठ संख्या: 94

3. कुछ शब्द परस्पर मिलते-जुलते अर्थवाले होते हैं, उन्हें पर्यायवाची कहते हैं। और कुछ विपरीत अर्थवाले भी। समानार्थी शब्द पर्यायवाची कहे जाते हैं और विपरीतार्थक शब्द विलोम, जैसे- पर्यायवाची-  चंद्रमा-शशि, इंदु, राका
               मधुकर-भ्रमर, भौंरा, मधुप
               सूर्य-रवि, भानु, दिनकर
विपरीतार्थक- दिन-रात
               श्वेत-श्याम
              शीत-उष्ण
पाठों से दोनों प्रकार के शब्दों को खोजकर लिखिए।

उत्तर

पर्यायवाची शब्द
बेनी - चोटी
काढ़त - गुहत
बलराम - दाऊ, हलधर
मैया - जननी, माँ, माता
दूध - दुग्ध, पय, गोरस
ढोटा - सुत, पुत्र, बेटा   
विपरीतार्थक शब्द
लम्बी - छोटी
स्याम - श्वेत
रात - दिन
प्रकट - ओझल
संग्रह - विग्रह
विज्ञ - अज्ञ


FOR CLASS 7 TH STD वीर कुँवसिंह Q & A


वीर कुँवसिंह 

1. वीर कुँवरसिंह के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया?

उत्तर

वीर कुँवरसिंह के व्यक्तित्व की निम्न विशेषताओं ने हमें प्रभावित किया है -
• बहादुर
• साहस
• बुद्धिमान व चतुर
• उदार
• सांप्रदायिक सद्भाव

2. कुँवरसिंह को बचपन में किन कामों में मजा आता था? क्या उन्हें उन कामों से स्वतंत्रता सेनानी बनने में कुछ मदद मिली?

उत्तर

कुँवरसिंह को बचपन में घुड़सवारी, तलवारबाजी और कुश्ती लड़ने में मजा आता था। उन्हें इन कामों से स्वतंत्रता सेनानी बनने में भरपूर मदद मिली। इन सब से उनके अंदर साहस और वीरता का विकास हुआ साथ ही वे तलवारबाजी और घुड़सवारी की कला में निपुण हुए जिसे उन्हेोने अंग्रेज़ों के खिलाफ युद्ध करने में इस्तेमाल किया।

3. सांप्रदायिक सद्भाव में कुँवर सिंह की गहरी आस्था थी- पाठ के आधार पर कथन की पुष्टि कीजिए।

उत्तर

इब्राहिम खाँ और किफायत हुसैन उनकी सेना में धर्म के आधार पर नहीं अपितु कार्यकुशलता और वीरता के कारण उच्च पद पर आसीन थे। उनके यहाँ हिन्दुओं के और मुसलमानों के सभी त्योहार एक साथ मिलकर मनाए जाते थे। उन्होंने पाठशाला के साथ मकतब भी बनवाए। इनसे पता चलता है की सांप्रदायिक सद्भाव में कुँवर सिंह की गहरी आस्था थी।

4. पाठ के किन प्रसंगों से आपको पता चलता है कि कुँवर सिंह साहसी, उदार एवं स्वाभिमानी व्यक्ति थे?

उत्तर

साहसी - ऊनि पूरी जीवन गाथा उनके साहसी होने का प्रमाण है। कुँवर सिंह ने जगदीशपुर हारने के बाद भी मनोबल नही खोया और संग्राम में भाग लिया। उन्होंने अपनी घायल भुजा को स्वयं काटकर गंगा में समर्पित कर दिया जो की साहस का अद्वितीय उदहारण है।

उदार - कुँवरसिंह बड़े ही उदार हृदय थे। उनकी माली हालत अच्छी न होने के बावजूद वे निर्धनों की हमेशा सहायता करते थे। उन्होंने कई तालाबों, कुँओं, स्कूलों तथा रास्तों का निर्माण किया।

स्वाभिमानी - वयोवृद्ध हो चुकने के बाद भी उन्होंने अंग्रेज़ों के सामने घुटने नहीं टेके और उनका डटकर मुकाबला किया।

5. आमतौर पर मेले मनोरंजन, खरीद फ़रोख्त एवं मेलजोल के लिए होते हैं। वीर कुँवरसिंह ने मेले का उपयोग किस रूप में किया?

उत्तर

वीर कुँवरसिंह ने मेले का उपयोग स्वतंत्रता की क्रांतिकारी गतिविधियों, गुप्त बैठकों की योजनाओं को कार्यान्वयित करने के रूप में किया।

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भाषा की बात

1. आप जानते हैं कि किसी शब्द को बहुवचन में प्रयोग करने पर उसकी वर्तनी में बदलाव आता है। जैसे - सेनानी एक व्यक्ति के लिए प्रयोग करते हैं और सेनानियों एक से अधिक के लिए।
सेनानी शब्द की वर्तनी में बदलाव यह हुआ है कि अंत के वर्ण 'नी' की मात्रा दीर्घ 'ी' (ई) से हृस्व 'ि' (इ) हो गई है।
ऐसे शब्दों को, जिनके अंत में दीर्घ ईकार होता है, बहुवचन बनाने पर वह इकार हो जाता है, यदि शब्द के अंत में हृस्व इकार होता है, तो उसमें परिवर्तन नहीं होता जैसे - दृष्टि से दृष्टियों।

नीचे दिए गए शब्दों के वचन बदलिए -
नीति, स्थिति, जिम्मेदारियों, सलामी, स्वाभिमानियों, गोली।

उत्तर

नीति - नीतियों
स्थिति - स्थितियों
जिम्मेदारियों - जिम्मेदारी
सलामी - सलामियों
स्वाभिमानियों - स्वाभिमानी
गोली - गोलियों

FOR CLASS 6 TH STD " लोकगीत "


लोकगीत 

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